Support us to Save SGRR (PG) College, D.Dun

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Petitioning: Appeal to the Uttarakhand Education Dept. & Shri Prakash Javedkar Ji

Petitioner: Common Student started on June 28, 2017

Support us to Save SGRR (PG) College, D.Dun

SGRR (PG) College के छात्रों की यह अपील पूरे छात्र समुदाय अथवा तमाम जनवादी ताकतों से है| SGRR (PG) College एक अर्ध सरकारी कॉलेज (semi govt.) है जिसको पूर्णतया प्राइवेट बनाने के लिए SGRR प्रबंधन एक नापाक साजिश कर रहा है| SGRR (PG) College को 1960 में देहरादून और उत्तराखंड के गरीब पिछड़े पहाड़ी आंचल के छात्रों के लिए बनाया गया इस कॉलेज को बनाने वाली SGRR संस्था एकनिर्लाभ संस्था है यानि यह संस्था जन सेवा के लिए काम करती और इन्हें लाभ कमाने से कोई मतलब नहीं है पर आज हम देख रहे हैं की हमारे कॉलेज को एक निजी विश्वविद्यालय में तब्दील किया जा रहा है और तेज़ गति से कॉलेज परिसर के भीतर एक ईमारत का निर्माण किया जा रहा है जो निकट भविष्य में एक दुकान होगी जहाँ छात्रों को लूटा जायेगा| पिछले 56 सालों SGRR (PG) College उत्तराखंड एवम् देश के 22 राज्यों से आने वाले छात्रों को सस्ती शिक्षा उपलब्ध करवा रहा था आज हम देख रहे है की यह एक महंगा प्राइवेट कॉलेज बनने जा रहा है| प्राइवेट कॉलेज की नीति यही होती है की सस्ते से सस्ते कोर्स की भी भारी भरकम फीस ली जाती है ऐसे में यह कॉलेज गरीब छात्रों की पहुँच से बहुत दूर हो जायेगा|
उत्तराखंड के बारे में एक कहावत प्रचलित है की “उत्तराखंड की जवानी” और “उत्तराखंड का पानी” कभी उत्तराखंड के काम नहीं आया, ऐसा इसलिए है क्योंकि जो गरीब छात्र सरकारी कॉलेज में सीटों की कमी के कारण मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त नहीं कर पाता है वह दिल्ली चंडीगढ़ जैसी जगहों पर मेहनत मजदूरी करने निकल जाता है और उसके जीवन में शिक्षा का सफ़र वहीँ ख़त्म हो जाता है| देहरादून के सरकारी कॉलेजों में वेसे ही सीटों की भारी कमी है उसके ऊपर से एक पूरे के पूरे सरकारी कॉलेज "SGRR (PG) College" को बंद करने की साजिश की जा रही है.
देहरादून के चार सरकारी डिग्री कालेजों में से एक SGRR (PG) College निश्चित ही देहरादून के अन्दर मौजूद सबसे अच्छे शैक्षणिक माहौल वाला डिग्री कॉलेज है| 2011 में हमारे कॉलेज को CPE(college with the potential for excellence) से भी नवाजा गया जिसका मतलब है की कॉलेज में उत्कृष्ट प्रतिष्ठित और श्रेष्ठ बनने की क्षमता है पर SGRR प्रबंधन ने सिर्फ इसका निजीकरण करने की क्षमता समझी क्योंकि वो इसे अपनी जागीर समझते हैं|
राज्य की राजधानी देहरादून में 1960 से मात्र चार सरकारी डिग्री कॉलेज हैं और सिर्फ उत्तराखंड बनने के बाद से यहाँ 15 से भी ज्यादा निजी विश्वविद्यालय खड़े हो गए हैं जिनका एक मात्र प्रयोजन पैसा कमाना है SGRR भी एक निजी विश्वविद्यालय बनने की राह पर चल पड़ा है|
वो दिन आ गए हैं जब हमारी गरीब जनता को ग्रेजुएशन की पढाई करने के लिए अपना खेत बेचना पड़ेगा| यह वह व्यवस्था है जिसमे गरीब आदमी अशिक्षित रह जायेगा और कभी जीवन में उठ नहीं पायेगा. जब गरीब और गरीब बनता जायेगा तो हम देश के विकास की कल्पना कैसे कर सकते हैं|
हमारे प्रधानाचार्य नयी यूनिवर्सिटी बनने के बाद सर्वेसर्वा बन जायेंगे उनका रुतबा एवं तनख्वाह बढ़ जाएगी बाकि शिक्षकों की भी पद्दोनती और आय वृद्धि हो जाएगी SGRR संस्था छात्रों से अच्छा खासा मुनाफा कमाकर अपना टर्नओवर बढ़ा लेगी, हमारे गणमान्य शिक्षकों की चांदी हो जाएगी और छात्र फीस के बोझ तले दब जायेगा| संस्था द्वारा एक गिरोह बनाकर भविष्य में संगठित संस्थागत लूट करने का जो इरादा है उसकी हम कड़ी भर्त्सना करते हैं और पूरा छात्र समुदाय इसके खिलाफ खड़ा रहेगा इसका आश्वासन देते हैं| कॉलेज खड़ा रहना चाहिए जो इसकी सीमा के अन्दर एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का कैंपस चलाने की साजिश की जा रही इसका हम पुरजोर विरोध करते हैं.
SGRR ने एक अर्धसरकारी उपक्रम रहते हुए 56 सालों में एक साख कमाई है इसमें छात्रों और शिक्षकों की मेहनत रही जिन्होंने यहाँ ज्ञान का सृजन एवं आदान प्रदान किया और इस कॉलेज का नाम बनाया, इस साख का इस्तेमाल करते हुए इस कॉलेज की छाती पर चढ़कर एक प्राइवेट विश्वविद्यालय का प्रचार एवं निरमाण किया जा रहा है जो की एक बहुत ही घृणित काम है|
हमारी भारतीय संस्कृति में प्रचलित कहावत है “विद्यादान –महादान” SGRR प्रबंधन इसको नए तरीके से परिभाषित कर रहा है “विद्यालूट- महालूट”
हमें किसी भी sgrr निजी यूनिवर्सिटी से क्या परेशानी होगी , sgrr एक बहुत बड़ा ग्रुप है जहा चाहे एक यूनिवर्सिटी बना ले पर हमारे अर्ध- सरकारी SGRR pg कॉलेज की बुनियाद पर हम एक निजी यूनिवर्सिटी ख़ड़ी होने नहीं देंगे|
यह संघर्ष छात्रों के साथ साथ जनता का भी संघर्ष है क्योंकि आज हमको सरकारी की नीतियों के कारण हमको यह बुरा दिन देखना पड़ रहा है। जवान लड़कों के हाथ में कलम की जगह शराब की बोतलें है। सरकार शराब ठेके खोलने के लिए नए नए जुगाड़ आजमा रही है पर SGRR (PG) College को बचाने के लिए कोई कदम नही उठा रही है।इनको शराब प्यारी है पर गरीब छात्रों के भविष्य से कोई मतलब नही।
अतः आप सभी से निवेदन है कि शिक्षा की इस लडाई मैं हमारा साथ दे व आंदोलन को सफल बनायें।।